मुजफ्फरपुर, जनवरी 28 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय और अभिधा प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन बुधवार को 'दलित अस्मिता: प्रतिरोध, सम्मान और न्याय चेतना' विषय पर व्याख्यान हुआ। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रो. ममता रानी ने किया। सेमिनार में साहित्यकार राकेश रेणु ने कहा कि दलित साहित्य में प्रतिरोध, सम्मान और न्याय का बहुत बड़ा अंश है। कर्मानंद आर्या ने कहा कि दलित साहित्य बदले का साहित्य न होकर बदलाव का साहित्य है। आरडीएस कॉलेज के प्रो. रमेश ऋतंभर ने कहा भारत में विविध संस्कृतियों के बावजूद जाति की अहम सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता है। अध्यक्षीय भाषण देते हुए रवि भूषण ने कहा कि आज दलित साहित्य के साथ दलित राजनीति पर भी चर्चा होनी चाहिए। सत्र का मंच संचालन...
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