जमुई, जनवरी 4 -- चंद्रमंडीह, निज संवाददाता लगातार किसानों को मेहनत का फल नहीं मिलने और खेती करने के लिए आतुर किसानों को तब धक्का लग जाता है। जब खेतों में लगाई गई पूंजी वापस नहीं होता है। मौथा चक्त्रवात ने किसानों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर ही दिया था।लेकिन इसके बावजूद भी किसानों ने महंगे आलू का बीज खरीद कर खेतों में वैज्ञानिक तौर तरीकों से उसे लगाया गया और दवाइयां भी दी गई।उसके बावजूद भी शीतलहर और कुहासे के कारण खेतो मे लगाई गई आलू की फसल झुलसा रोग लग जाने से बर्बाद हो गया। किसानों द्वारा हरेक जगहों पर कहा जा रहा है कि प्रकृति के प्रकोप से बच पाना काफी मुश्किल है। किसानों की कमर तब टूट जाती है जब मेहनत का फल नहीं मिलता है। चकाई प्रखंड के ललन उपाध्याय, रजनी उपाध्याय, अवनी उपाध्याय, मनोज उपाध्याय, संजय उपाध्याय, महेंद्र यादव, गुड्डू यादव, शनि...
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