नवादा, जनवरी 16 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। बिहार के मगध क्षेत्र का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला नवादा शहर आज एक अदृश्य लेकिन भयावह संकट के मुहाने पर खड़ा है। यह संकट है, वायु प्रदूषण और धूल का जानलेवा तांडव। शहर की आबोहवा में जहर घुल चुका है। स्थिति यह है कि विकास के नाम पर खोदी गई सड़कें और निर्माण कार्यों की लापरवाही ने पूरे शहर को एक डस्ट चैंबर में तब्दील कर दिया है। नवादा का विकास स्वागत योग्य है, लेकिन यह विकास नागरिकों की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए, यह पर्यावरणविदों समेत प्रकृतिप्रेमी लोगों की सोच है। प्रबुद्धजनों ने भी कहा कि धूल और वायु प्रदूषण एक मौन महामारी है, जो धीरे-धीरे शहर की जीवनशक्ति को निगल रही है। समय आ गया है कि जिला प्रशासन, नगर परिषद और स्वयं नागरिक एकजुट होकर स्वच्छ नवादा, स्वस्थ नवादा के संकल्प को धरातल पर ...
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