वाराणसी, दिसम्बर 7 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। वृश्चिक मास आंग्ल तारीख के अनुसार 15 दिसंबर को समाप्त हो जाता है। इसके साथ ही सभी पर्वों की भी समाप्ति हो जाती है। सूर्य के धनुर्राशि में प्रवेश करते ही 16 दिसंबर से धनुर्मास प्रारंभ हो जाता है, जो खरमास माना जाता है। दक्षिण भारत के लोग भी इस माघ माह को अपशकुनी मानते हैं। उनका विचार है कि इस महीने में कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। घरों में मंगलगान नहीं गाए जाते। स्त्रियां शृंगार नहीं करतीं। अशुभ की छाया को कम करने के लिए वहां के लोग भगवत् भजन में बिताते हैं। इस महीने में सिर्फ देव कार्य ही होते हैं। सभी मंदिरों में धनुर्मास पूरे महीने मात्र देवोत्सव मनाया जाता है। गांव-गांव में लोग अरुणोदय में ही उठकर भगवत् भजन करते हुए 'ग्राम प्रदक्षिणा' (प्रभात फेरी) में निकल जाते हैं। मंदिरों में विशेष पूज...