कानपुर, फरवरी 4 -- मृतक अधिवक्ता राजाराम वर्मा जिस जमीन के लिए पांच दशक तक कोर्ट में लड़ाई लड़ते रहे, उनकी वह जमीन वर्ष 1985 में ही बिक गई थी। यह खुलासा तब हुआ जब नवंबर 2025 को उनके बेटे नरेंद्र देव को महाराजपुर नायब तहसीलदार का दाखिल खारिज का नोटिस मिला। इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस आयुक्त से की जिस पर जांच शुरू हो गई है। इस जांच में लखनऊ और आर्यनगर के दो नाम सामने आए हैं। साथ ही तहसील के कई दस्तावेजों में पुलिस को छेड़छाड़ मिली है। राजाराम वर्मा के बेटे नरेंद्र देव ने सोमवार को पुलिस आयुक्त से मिलकर एक प्रार्थना पत्र दिया था। नरेंद्र देव के आरोपों के मुताबिक बीते वर्ष राकेश तिवारी ने उन्हें रजिस्ट्री का एक पेज दिखाया। बताया कि राजाराम वर्मा ने वर्ष 1985 में करीब 37 बीघा जमीन लखनऊ रकावगंज निवासी दिनेश सिंह संतोषी को बेच दी थी। दिनेश ने इस ...
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