हाथरस, जनवरी 9 -- हाथरस। विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने मन ही मन श्रीकृष्ण को पति मान लिया था, लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया। तब रुक्मिणी ने सुदेव ब्राह्मण के हाथ श्रीकृष्ण को पत्र भेजा और कृष्ण ने शिशुपाल की बारात आने से पहले ही रुक्मिणी का हरण कर लिया। उनसे युद्ध किया और फिर द्वारिका ले जाकर उनसे विवाह रचाया। यह प्रवचन गुरुवार को शहर के सरक्यूलर रोड स्थित बलकेश्वर महादेव मंदिर पर चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिन कथा व्यास जगतगुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर मलूक पीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज के परम स्नेही शिष्य रसराज दास जी महाराज ने कहे। लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा आगे कहा कि तुलसी और चंदन से प्रेम होना ब्रजवासी की पहचान है। विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी अत्यंत रूपवान और...