हेमलता कौशिक, दिसम्बर 7 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के पक्ष में पारित उस मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा, जिसमें पारसवनाथ डेवलपर्स लिमिटेड (पीडीएल) पर लगभग 70 लाख रुपये से अधिक की देनदारी तय की गई थी। जस्टिस जस्मीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि कंसेशन एग्रीमेंट के तहत डीएमआरसी की तरफ से किसी तरह का उल्लंघन नहीं किया गया। परियोजना के पूरा न हो पाने का कारण पारसवनाथ व उसके सब-लाइसेंसी की लापरवाही थी, जिन्होंने आवश्यक स्थानीय निकाय की मंजूरी के लिए उचित आवेदन ही पेश नहीं किया। यह विवाद तीस हजारी मेट्रो स्टेशन पर वाणिज्यिक क्षेत्र के विकास से जुड़ा है। डीएमआरसी ने इस स्थान पर कमर्शियल डिवेलपमेंट के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसमें पारसवनाथ डेवलपर्स सफल बोलीदाता बना। 25 फरवरी 2005 को दोनों के बीच एक कंसेशन एग्र...