बागपत, नवम्बर 16 -- श्री दिगंबर जैन पुराना मंदिर बिनौली परिसर में धर्मसभा का आयोजन किया गया। जैन मुनि प्रणम्य सागर महाराज प्रवचन के दौरान कहा तीर्थंकरों की वाणी से श्रुत ज्ञान मिलता है। कहा कि शास्त्रों का ज्ञान श्रुत ज्ञान है। यह ज्ञान समुद्र की तरह है, जिसे शास्त्रों के ज्ञान को जिनवाणी का ज्ञान कहते हैं। आज प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी दुख, चिंता से पीड़ित है। यदि हम इस ज्ञान का जिनवाणी का नित्य प्रतिदिन थोड़ा भी श्रद्धा में लाते हैं, तो जीवन में दुख चिंताओं से मुक्ति मिल सकती है। श्रद्धालुओं को ध्यान योग की जीवन में उपयोगिता बताई तथा अरहम ध्यान योग की पांच मुद्राओं का अभ्यास अभ्यास कराया। श्रद्धालुओं को संकल्प कराया कि स्वस्थ रहने के लिए इन पांच मुद्राओं का नित्य नियम से अभ्यास करेंगे। सौरभ जैन ने दीप प्रज्ज्वलित किया, कुसुम जैन परिवार ...