लखनऊ प्रमुख संवाददाता, जनवरी 30 -- कार खरीदी 3 लाख 70 हजार की और बीमा कराया 29 लाख रुपये का। बीमा होने के बाद कार चोरी हो गई। क्लेम पाने के लिए उपभोक्ता ने आयोग में गुहार लगाई तो कलई खुल गई। आयोग ने पाया कि उपभोक्ता के पास चोरी हुई मर्सडीज जिसका क्लेम मांगा, उसके अलावा भी कई गाड़ियां हैं। कार कैश में खरीदी गई, जो नियमों का उल्लंघन है। कार की कीमत 2.90 करोड़ है लेकिन खरीदी गई पौने चार लाख में। इंश्योरेंस कंपनी से मिलीभगत कर के क्लेम लेने के संगठित अपराध की भनक लगने के बाद राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सख्त निर्णय लिया। मुकदमा दर्ज कराने वाले पर 10 लाख रुपये हर्जाना आरोपित किया जो मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा। साथ ही एनसीआर पुलिस कमिश्नर, क्राइम ब्रांच के अलावा शासन को भी आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक...
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