लखनऊ, जनवरी 27 -- तीन ग्राम स्मैक रखने का आरोपी 34 वर्ष बाद साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। जीवन के आधी उम्र तक मुकदमा लड़ने के बाद आरोपी अनिल यादव को न्यायिक मजिस्ट्रेट इंदू यादव ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने स्मैक बरामदगी की जानकारी 72 घंटे के अंदर उच्चाधिकारियों को नहीं दी। इसके पहले आरोपी की गिरफ्तारी के समय उसकी तलाशी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पेश नहीं किया और खुद तलाशी लेने के लिए आरोपी की लिखित सहमति भी नहीं ली। जिससे स्पष्ट है की पुलिस टीम ने एनडीपीएस एक्ट के प्रवधानों का घोर उल्लंघन करते हुए उनका पालन नहीं किया। पत्रावली के अनुसार हसनगंज थाने के दरोगा ललितमणि त्रिपाठी ने सात नवंबर 1992 को थाने मे...
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