बगहा, नवम्बर 26 -- बेतिया, हन्दिुस्तान संवाददाता। पांच वर्ष पूर्व कोविड महामारी और देशव्यापी तालाबंदी के बीच केन्द्र सरकार ने तीन काले कृषि कानूनों की मदद से खेती को बड़े पूँजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साजिश रची थी। उक्त बातें अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय पार्षद सह पश्चिम चंपारण के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने बुधवार को समाहरणालय पर प्रदर्शन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मंडी अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन कर केन्द्र सरकार ने फसल खरीद और खाद्य वितरण पर कॉरपोरेट जगत का कानूनी नियंत्रण स्थापित करने का काम किया है। उन्होंने कहा गन्ना मूल्य 600 रूपए किए बगैर पेराई सत्र शुरू हो गया। धान का मूल्य भी 3100 रुपए नहीं किया गया न उसकी खरीदारी शुरू हुई। ऑल इंडिया सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियन (एक्टु) के जिला संयो...