गिरडीह, जनवरी 1 -- तिसरी। कहते हैं कि जहां विज्ञान की व्याख्या कुंद हो जाती है, वहीं से देव प्रभावों की चर्चा शरू होती है। कुछ इसी सिद्धांत पर एक अजीब सा नजारा देखने को मिलता है तिसरी के गम्हरियाटांड़ के एक छोटी सी पहाड़ी पर। यह पहाड़ी तिसरी के गम्हरियाटांड़ के उतरी छोर पर है। लगभग पचास मीटर वाली इस पहाड़ी के नीचे से सालों भर एक रफ्तार में मीठा और स्वादिष्ट पानी निकलता है। जहां अप्रैल और मई का महीना आते ही प्रचंड गर्मीं से पूरे प्रखंड के अधिकतर गांवों के कुएं, चापाकल, तालाब व नदी-नाले सूख जाते हैं वहीं इस झरना से सालोंभर एक जैसा एक रफ्तार में पानी निकलता रहता है। यही कराण है कि लोग इसे देवी प्रभाव मानते हैं क्योंकि जमीन के सैकड़ों फीट नीचे चापानल के पाइप में जहां पानी नहीं मिलता है वहीं सुखी पहाड़ी के नीचे से जलस्रोत कायम है। लिहाजा स्वादि...