शाहजहांपुर, मई 5 -- द पाठक मंच के तत्वावधान में ग़ज़ल गुफ़्तगू सीज़न 3 का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में ददरौल विधायक अरविन्द सिंह, विशिष्ट अतिथि अशफ़ाक़ उल्ला खां व अजय मीरा पाण्डेय ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्मक्रम की शुरूआत में वरिष्ठ शायर असगर यासिर ने अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए कहा कि ख़ुदा का शुक्र कर भटके मुसाफ़िर,हमारे कारवां तक आ गया है। कवि ज्ञानेन्द्र मोहन ''''ज्ञान'''' ने अपनी ग़ज़ल के ज़रिए सामाजिक विसंगतियों पर चोट की। उन्होने कहा कि, पर नोचकर बया के उड़ा दी गई तो क्या, रुकने के बाद नब्ज़ दवा दी गई तो क्या। करने के बाद रेप जलाया गया उसे, मुज़रिम को उम्र क़ैद सज़ा दी गई तो क्या। जिसके बाद सभी ने ताली बजाकर उत्साहवर्धन किया। शाइरा गुलिस्तां ख़ान ने आधी आबादी के हक़ की बात अपनी शायरी से कुछ इसलिए तरह कही- मैं जो नहीं...
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