लखनऊ, फरवरी 18 -- लखनऊ, प्रमुख संवाददाता यूपी की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में तार्किक विसंगति वाले 2.22 करोड़ मतदाताओं की घर पर ही बीएलओ सुनवाई कर मामले का निस्तारण कर देंगे। नोटिस पाने वाले मतदाताओं के परिवार के सदस्य जिसमें बेटा-बेटी, पति-पत्नी, माता-पिता, दादी-बाबा, चाचा व भतीजे इत्यादि भी नोटिस से संबंधित दस्तावेज दे सकेंगे। फिर विसंगति दूर कर दी जाएगी। सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि क्योंकि तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में हैं, ऐसे में इनका मिलान तो हो ही चुका है। सिर्फ विसंगति दूर की जानी है। जो नाम, पिता के नाम, माता-पिता व बाबा-दादी की उम्र से कम अंतर के कारण हैं, उससे संबंधित दस्तावेज लेगा। वर्ष 2003 की मतदाता सूची का पेज, रिश्ते या उम्र से संबंधित साक्ष्य का दस्तावेज...