मधुबनी, जुलाई 7 -- मधेपुर। कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन साहब के शहादत की याद में मोहर्रम पर्व में खेल-तमाशे का कार्यक्रम शबाब पर रहता है। लेकिन आधुनिकता का प्रभाव मुस्लिम भाइयों के पवित्र पर्व मुहर्रम पर भी दिख रहा है। बदलते परिवेश एवं समय के साथ ताजियों के स्वरुप में भी बदलाव अब दिख रहा है। ताजिये की ऊंचाई अब पहले की तरह नहीं दिखती। पहले जहां बीस से पच्चीस फीट ऊंचाई बाले ताजिया बनायी जाती थी। परंतु अब आठ-दस फीट के ही ताजिये एवं सिफल बन रहे हैं। हजरत इमाम हुसैन साहब की शहादत के याद में गम के प्रतीक इस पर्व में खेल-तमाशे एवं कलाबाजी करतब के दौरान सिर्फ गम आधारित धुनों पर ही बाजे नहीं बजाये जाते। बल्कि इसमें फिल्मी संगीत का समावेश भी सुनने को मिल रहा है। हालांकि, अखाड़ों के प्रतिनिधि तथा मधेपुर बाजार के एक मोहल्ला में ताजिया बना रहे म...
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