बलरामपुर, दिसम्बर 7 -- उतरौला, संवाददाता। उतरौला तहसील भवन का ऐतिहासिक मुख्य द्वार जिससे कभी सैकड़ों लोग प्रतिदिन निर्बाध रूप से तहसील परिसर में प्रवेश किया करते थे, आज वह अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। इस द्वार के बाहर वर्तमान समय में अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, और भीतर कूड़े-कचरे का ढेर तथा जंग खाई रेलिंग को देखकतर बदहाली को बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उतरौला तहसील भवन का निर्माण हुआ था, तब यही द्वार आम जनता और अधिकारियों के आने-जाने का प्रमुख मार्ग था। इसकी चौड़ाई इतनी अधिक थी कि दो गाड़ियां एक साथ निकल सकती थीं। आज यह गेट पूरी तरह से बंद पड़ा है। इसके इर्द-गिर्द की दीवारें काई और दरारों से जर्जर हो चुकी हैं। वर्तमान में जिस द्वार से तहसील में प्रवेश की अनुमति है वह अत्यंत सकर...