रांची, दिसम्बर 5 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पति द्वारा दायर तलाक की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि पत्नी के खिलाफ क्रूरता के आरोप साबित नहीं हो सके हैं। वहीं, कोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों की देखभाल के लिए फैमिली कोर्ट द्वारा तय की गई साझा अभिरक्षा (शेयर पेरेंटिंग) व्यवस्था को भी बरकरार रखा है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने कहा कि दंपती 2011 से 2017 तक एक साथ रहे और बीच दो बच्चों का जन्म हुआ। पति ने पत्नी के कथित दुर्व्यवहार को लेकर न तो कोई स्वतंत्र गवाह पेश किया और न ही विवाह के शुरुआती वर्षों में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने माना कि साक्ष्य गंभीर क्रूरता का मामला सिद्ध नहीं करते। फैमिली कोर्ट ने सितंबर 2022 में पति की तलाक याचिका यह कहते हुए खार...