नई दिल्ली, दिसम्बर 5 -- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को पहली पत्नी के तलाक का मामला विचाराधीन होने के बावजूद दूसरी शादी करने के लिए तीन महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति अलका सरीन ने महिला द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सजा सुनाते हुए 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 का जानबूझकर उल्लंघन किया। यह धारा स्पष्ट रूप से वैधानिक अवधि के भीतर तलाक की डिक्री को चुनौती दिए जाने पर पुनर्विवाह को प्रतिबंधित करती है। जज ने पति की माफी खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि स्थगन आदेश की अवहेलना करना और अपीलीय प्रक्रिया को कमजोर करना दीवानी अवमानना के समान है। महिला का तर्क था कि पति के इस कदम से अदालत न्यायालय के अधिकार को सीधी चुनौती है। उसने आगे दलील दी कि पति के आच...