सिमडेगा, अगस्त 28 -- सिमडेगा, जिला प्रतिनिधि। जैन भवन में पर्यूषण महापर्व का समापन गुरुवार को अष्ट दिवसीय अखंडपाठ की पूर्णाहुति और क्षमापना पर्व के आयोजन के साथ हुआ। मौके पर आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है, कायर इसे धारण नहीं कर सकते। क्षमा से अंतःकरण शुद्ध होता है और शुद्ध हृदय में ही धर्म का वास होता है। स्वामी जी ने कहा कि संवत्सरी पर्व हमें यही सिखाता है कि शत्रु के प्रति भी पुत्रवत प्रेमपूर्ण का व्यवहार करना चाहिए। आचार्य जी ने तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मशुद्धि का मार्ग तप और क्षमाभाव से होकर ही गुजरता है। सभा में पंडित वासुदेव गौतम और विद्याबंधु शास्त्री ने भी गुरु और क्षमा की महत्ता बताई। मौके पर आचार्य पद्मराज जी द्वारा संपादित सुंदरकांड पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मौके पर...