बेगुसराय, अक्टूबर 9 -- सिमरिया धाम, एक संवाददाता। तपस्या से ही मनुष्य को इहलौकिक सुख और पारलौकिक गति की प्राप्ति होती है। उक्त बातें सर्वमंगला सिद्धाश्रम के ज्ञानमंच से स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि देव कर्म और पितृ कर्म सभी प्रकार के सामाजिक कर्म, राष्ट्र कर्म और संस्कृति हित का काम करने वाले मानव ही प्रथम श्रेणी के होते हैं। जो दूसरे की देखा-देखी करते हुए कर्म और कुकर्म करता है वह मध्यम श्रेणी का मानव कहा जाता है जबकि इस संसार में भोग विलास में ही सदा पड़ा रहने वाला निम्न श्रेणी का मानव कहलाता है। वे सभी श्रद्धालु धन्य हैं जो अपना घर-परिवार छोड़कर भी यहां इस धरा धाम पर कल्पवास करने के लिए पधारे हैं। सभी सनातन धर्मावलंबी का काम है कि वे सबसे पहले किसी भी पूजन में प्रत्यक्ष स्वरूप सूर्यदेव की उपासना करते हैं। मौके पर स...
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