प्रयागराज, फरवरी 11 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाकर दायर की गई एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत में 'साफ हाथों' के साथ आना अनिवार्य है और तथ्यों को छिपाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। मामला मौजा-गोविंदपुर, तहसील-सदर (प्रयागराज) स्थित अराजी संख्या 379 से जुड़ा है, जिसे खलिहान यानी सार्वजनिक उपयोग की भूमि बताया गया। याचिकाकर्ता फिरोज अहमद ने यहां से कथित अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। हालांकि प्रयागराज विकास प्राधिकरण और निजी पक्षों ने अदालत को बताया कि यह जनहित नहीं, बल्कि निजी विवाद है। सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि विपक्षी ने याचिकाकर्ता के खिला...
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