सुपौल, जून 23 -- हर परिवार को एक नाव की जरूरत, प्रशासनिक मदद नहीं, खुद उठाते खर्चा चार साल से विभागीय स्तर से सरकारी नाव की खरीद नहीं, लोगों में मायूसी बाढ़ के समय लोग निजी नाव से एक जगह से दूसरी जगह करते हैं आवागमन निजी नर्मिाण करने के लिए कारीगर आज भी पूर्वजों की ही निभा रहे परंपरा किशनपुर। कोसी के दोनों तटबंधों के बीच अच्छी खासी आबादी आज भी बसी है। सुदूर व दुर्गम इलाके में तो कोसी महासेतु ने क्रांति ला दी है। बावजूद इसके एक बड़े इलाके के लोगों के लिए आज भी बरसात के मौसम में नाव ही सहारा है। आलम यह है कि एक तो सरकारी नाव की यहां व्यवस्था नहीं होती है। मामला बिगड़ने पर निजी नाव पर ही सरकारी मुहर लगा दी जाती है। दूसरा नाव के परिचालन के लिये नाविकों को कभी प्रशक्षिण नहीं दिया जाता है। इतना ही नहीं प्रशासन की ओर से पिछले चार साल से यहां सरकार...
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