नई दिल्ली, जनवरी 24 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा के लिये नवगठित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के पाकिस्तान के फैसले ने देश के राजनीतिक हलकों में तीव्र विरोध को जन्म दिया है। गुरुवार को संसद में भारी हंगामा हुआ, जिसमें विपक्षी दलों ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे नेतृत्व की ट्रम्प से करीबी बढ़ाने की कोशिश बताया। गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़े मामले में पारदर्शिता की कमी और संसदीय अनुमोदन न लेने पर सवाल उठाते हुए, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय महत्व की आवश्यकताओं के आधार पर विदेश नीति तैयार करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय दबाव के आधार पर देश की विदेश बनायी जा रही है। नेशनल असेंबली में बोलते हुए रहमान ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के ऐ...
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