नई दिल्ली, जनवरी 23 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावोस में बोर्ड ऑफ पीस के गठन का ऐलान कर दिया। उनकी ओर से इसका जो प्रस्ताव दिखाया गया, उसमें 8 मुसलमान मुल्कों समेत कई देशों की ओर से सहमति का पत्र था। गाजा को फिर से खड़ा करने के लिए तैयार इस बोर्ड को लेकर मुसलमान देश तो जुड़ गए हैं, लेकिन यूरोपियन यूनियन के देश हिचक रहे हैं। इसके अलावा भारत, रूस और चीन जैसे बड़े देशों ने भी अब तक इससे दूरी ही बनाकर रखी है। इस बीच सवाल है कि आखिर भारत की इस संबंध में क्या रणनीति है और वह डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने से हिचक क्यों रहा है। इसकी तीन वजहें हैं। पहला कारण तो यही है कि भारत की नीति देखो और इंतजार करो की है। भारत चाहता है कि पहले यह देखा जाए कि दुनिया के कौन-कौन से देश इससे जुड़ने को तैयार हैं। अब तक रूस और चीन इसक...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.