वरिष्ठ संवाददाता, जनवरी 14 -- रायबरेली के महाराजगंज के अमर कमल रस्तोगी के जीवन में इस साल का पहला दिन यानि पहली जनवरी की तारीख ऐसा बदलाव लेकर आई कि उन्होंने करोड़ों की संपत्ति को ठोकर मार दी। प्रयागराज संगम की रेत पर मन सनातन में ऐसा रमा कि एसी कमरा, बेहतरीन दफ्तर और बाकी सुख सुविधाएं छोड़कर संन्यास की राह को अपना लिया। गुरु की शरण में पहुंचे और अपना क्षौरकर्म कराकर अब इस ठंड में पुआल के बिस्तर पर ताउम्र जीवन गुजारने का संकल्प ले लिया। 25 साल के अमर कमल रस्तोगी का रायबरेली में जन सेवा केंद्र था। बैंक से जुड़े होने के कारण बैंक अफसरों से अच्छा तालमेल था और जीवन बेहतरीन गुजर रहा था। बड़े होटलों और महंगे रेस्टोरेंट में जाना उनकी दिनचर्या में शामिल था। तीन बहनों में अकेले भाई अमर को माता-पिता का दुलार भी खूब मिल रहा था। बड़ी बहन जन सेवा केंद्...