कानपुर, जनवरी 31 -- कानपुर। डीएवी महाविद्यालय के चंद्रशेखर आजाद सभागार में डॉ. राज तिलक ने जिंदगी जीने के हुनर-भावनात्मक अक्लमंदी और पुनरुत्थान विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ. राज तिलक ने बताया कि हर व्यक्ति अलग और विशिष्ट होता है, इसलिए स्वयं की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आत्म-विकास के तीन चरण बताएं - जागरूकता, स्वीकृति, और कार्यवाही। उन्होंने सहानुभूति, आलोचनात्मक चिंतन, और प्रभावी संवाद जैसे जीवन कौशलों पर प्रकाश डाला। प्राचार्य प्रोफेसर अरुण कुमार दीक्षित ने कहा कि सफलता हमारे नजरिये का नतीजा होती है और युवाओं को आत्म-जागरूकता और भावनात्मक दृढ़ता विकसित करनी चाहिए। यहां प्रोफेसर सुनीत अवस्थी, प्रोफेसर विनोद पांडेय मौजूद थे। संचालन प्रोफेसर बी के दुबे ने किया।
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