बिजनौर, मई 4 -- रिश्ते के ताऊ द्वारा एक किशोरी से दुष्कर्म के मामले में जब शिकायतकर्ता मामा-मामी ही पक्ष द्रोही हो गए तो इस संवेदनशील मामले में अदालत की गंभीरता ने अपना असर दिखाया। शिकायतकर्ता मामा-मामी द्वारा गवाही से मुकरने के बाद अदालत ने सच्चाई का पता लगाने को डीएनए टेस्ट कराया। डीएनए टेस्ट ने पूरी सच्चाई बयां कर दी। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पॉक्सो कोर्ट की स्पेशल सत्र न्यायाधीश कल्पना पांडे ने पीड़िता के आरोपी ताऊ को दोषी पाया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 42 वर्षीय आरोपी ताऊ शादीशुदा है और तीन बच्चों का पिता है। विशेष लोक अभियोजक भालेद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पिछले वर्ष नंवबर में बढ़ापुर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने नजीबाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि...
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