सुपौल, नवम्बर 25 -- सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता एक तरफ जहां बिहार के कुछ जिलों में ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम की पुष्टि हुई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में फिलहाल इस तरह का मामला संज्ञान में नहीं आया है। इस वजह से पानी का सैंपल लेकर यूरेनियम की मात्रा की जांच भी नहीं हुई है। पीएचईडी के ईई विकास सिंह ने बताया कि जिले के पानी में मानक से अधिक मात्रा में यूरेनियम नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार पानी में यूरेनियम की मात्रा 30 माइक्रोग्राम या उससे कम होनी चाहिए लेकिन खगड़िया, बेगुसराय, भोजपुर, कटिहार और नालंदा जिलों में मानक से अधिक मात्रा अधिक होने की वजह से मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी खतरा है। इधर, सीएस डॉ. ललन ठाकुर ने बताया कि जिले में अभी तक इस तरह के मामला संज्ञान में नहीं आया है। फिलहाल ब्...