अलीगढ़, दिसम्बर 6 -- (सवालों में अस्पताल) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। निजी अस्पतालों की सेहत मुनाफे पर टिकी है, मरीजों की सुविधा पर नहीं। कई अस्पतालों ने एंबुलेंस सेवाओं को ठेके के व्यवसाय में बदल दिया है। चालक सीधे अस्पताल प्रबंधन से जुड़े हैं, मरीज पहुंचते ही किराए की पर्ची सामने रख दी जाती है। वहीं, अस्पताल भवनों से ज्यादा फुटपाथ और सड़क पर कब्जा आम हो चुका है। बाहर खड़े वाहन, लगातार हॉर्न और जाम से मरीज-तीमारदार त्रस्त हैं। कई अस्पताल तो दुकानों में संचालित हैं। यहां नियमों की किताब धूल खाती दिखती है। मुनाफे की दौड़ में शामिल अस्पतालों में मरीज की तकलीफ नहीं, बल्कि जेब की क्षमता प्राथमिकता बन चुकी है। नियमों के अनुसार अस्पताल परिसर में मरीजों की सुविधा, पार्किंग और आपात वाहन की व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन जमीनी तस्वीर इससे उलट है। कई अस...