कोडरमा, जनवरी 8 -- कोडरमा, वरीय संवाददाता झुमरीतिलैया शहर के पुराना बस स्टैंड। घना कोहरा है। पारा भी करीब सात डिग्री पर है। ठंडी हवा सीधे हड्डी तक पहुंच रही है। इस हाड़ कपाने वाली ठंड में पेट की आग बुझाने मजदूर रोड किनारे खड़े हैं। कुछ बैठे भी हैं। उन्हें काम पर ले जाने वालों की तलाश है। किसी की गाड़ी रुकती है तो लगता है आज काम मिल जाएगा। दौड़ कर पूछते हैं क्या काम है बाबू... लेबर चाहिए का। जवाब आता है कि नहीं उन्हें किसी मजदूर की तलाश नहीं। इतना सुनते ही एक बार फिर सबों के चेहरे पर हताशा। यह हाल किसी एक झुमरीतिलैया पुराना बस स्टैंड का नहीं है। ऐसे ही दर्जनों मजदूर शहर में दूसरी जगह भी काम की तलाश में रोजाना आते हैं और काम नहीं मिलने पर निराश होकर लौट जाते हैं। मजदूरों को काम देने वाले इस चौराहा पर मजदूरों की बेबसी सर्दी के सितम की कहानी ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.