गंगापार, नवम्बर 16 -- ठंडी का मौसम आते ही ग्रामीण इलाकों में अल्पाहार में बदलाव हो जाता है।लाई और चूड़ा को विभिन्न प्रकार से व्यंजन बनाकर खाया जाता है।इसी की तैयारी में जगह जगह चूड़ा कुटाई की मशीन लगा दी गई है। काफी संख्या में चूड़े की कुटाई कराने के लिये ग्रामीण इकट्ठा हो रहें है। सर्दी के मौसम में ग्रामीणों के खानपान में बदलाव होना शुरू हो जाता है। तलखा, घुघुरी, दम आलू, लाई चना, पोहा, चूड़ा दही, चूड़ा दूध, बाटी चोखा आदि खूब खाया जाता है। अब इसी की तैयारी में ग्रामीण जुट चुके हैं। लाई और चूड़ा बनवाया जा रहा है। इसी के क्रम में चूड़ा कूटने की मशीनें हर पाँच-दस किलोमीटर पर लगा दी गई है। जहां सुबह से ही ग्रामीण लाइन लगा लेते है। मशीन लगाने वालों को भी खूब मेहनत पड़ रही है। इस व्यवसाय में कम से कम तीन श्रमिक की आवश्यकता पड़ती है। एक गीले धान को भूनता...
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