अलीगढ़, फरवरी 9 -- (विश्व मिर्गी दिवस) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। मिर्गी जैसी गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी का आज भी अंधविश्वास और भ्रांतियों के कारण सही समय पर उपचार नहीं हो पाता। बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन चिकित्सा उपचार के बजाय दरगाहों, मंदिरों या झाड़-फूंक करने वाले ओझाओं के चक्कर लगाते रहते हैं, जिससे बीमारी नियंत्रित होने के बजाय और बिगड़ जाती है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में हर वर्ष छह सौ से अधिक मिर्गी रोगी उपचार के लिए आते हैं। वहीं विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 10 से 12 नए या पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर मरीज 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं, जिनमें युवाओं और कामकाजी लोगों की संख्या ज्यादा है। अब भी लगभग 15 से 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो इस बीमारी को दैवीय या ऊप...