प्रयागराज, जनवरी 5 -- उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) के चलो मन गंगा यमुना तीर के अंतर्गत चल रही शब्द ब्रह्म संगोष्ठी के दूसरे दिन सोमवार को कल्पवास की सात्विक परंपरा और भारतीय जीवन दर्शन पर विमर्श हुआ। साहित्यकार डॉ. रविनंदन सिंह ने कहा कि कल्पवास की सात्विक परंपरा ज्ञान, भक्ति और आस्था का समन्वय है। यह सत, रज व तम तीनों गुणों को संतुलित करने की परंपरा है, जिसमें जीवन में रहते हुए मोक्ष की अनुभूति व वीतरागी बनने का भाव निहित है। डॉ. अलका प्रकाश ने कहा कि कल्पवास भारतीय अध्यात्म की वह सात्विक साधना है, जहां मनुष्य प्रकृति, संयम और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने जीवन को शुद्ध करता है। केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा ने दोनों वक्ताओं को अंगवस्त्र व पौधा भेंटकर सम्मानित किया। संगोष्ठी के दूसरे सत्र में गुरुबाणी के अंतर्गत नव ज्य...