शामली, नवम्बर 2 -- शहर के जैन धर्मशाला में रविवार को श्री 108 विव्रत सागर मुनिराज ने प्रवचन में युवा पीढ़ी का धर्म से विमुख होना और धर्म के वास्तविक उद्देश्य की कमी जैसे गंभीर विषय पर विस्तारपूर्वक विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी का मंदिरों, जिनालयों और धार्मिक गतिविधियों से दूर होना समाज के लिए चिंता का विषय है। युवा यह प्रश्न करते हैं कि मंदिर जाने, जिनवाणी पढ़ने या गुरुओं की सेवा करने से क्या लाभ होगा। क्या इससे धन मिलेगा या परीक्षा में सफलता मिलेगी, लेकिन परिवार और समाज से अक्सर उन्हें इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिलते। गुरुदेव ने कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल अगला जन्म सुधारना नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन में शांति और आत्मिक संतुलन प्राप्त करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसान अनाज के लिए खेती करता है, भूसे क...