नई दिल्ली, नवम्बर 13 -- केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह माओवाद से जुड़े कई मामलों के संबंध में जेल में बंद रूपेश द्वारा लिखित पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति देने पर तीन महीने के भीतर निर्णय ले। जस्टिस वी.जी. अरुण की पीठ ने पिछले सप्ताह रूपेश द्वारा दायर याचिका पर विचार किया, जिसे गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत दोषी ठहराया गया था और पिछले कई वर्षों से जेल में बंद था। रूपेश ने जेल में रहते हुए 'बंधीथारूडे ओरमाकुरिप्पुकल' (कैदियों के संस्मरण) नामक पुस्तक लिखी और पांडुलिपि के साथ प्रकाशन की अनुमति के लिए जेल अधीक्षक से आवेदन किया। याचिका में कहा गया कि हालांकि, उसके अनुरोध पर निर्णय लेने में अत्यधिक देरी हुई है, जिसके कारण उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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