पूर्णिया, मार्च 3 -- बनमनखी, संवाद सूत्र। जीव अमर है, इसे कोई नहीं मार सकता और ना हीं मरता है। यह अपने कर्मों के आधार पर अपना शरीर बदलता है। शरीर खत्म हो जाता है परंतु उनके अंदर का जीव सदैव अमर रहता है। जीव की कभी मृत्यु नहीं होती। वह सिर्फ एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित होता रहता है। यह बातें दो दिवसीय विश्व स्तरीय संतमत सत्संग में प्रवचन के दौरान व्यासानंदजी महाराज बनमनखी के सिकरीगढ़ धरहरा में आयोजित सत्संग समारोह के दूसरे दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को अच्छा जीवन जीने के लिए अधिक धन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार मनुष्य के भीतर के जीव को अच्छा शरीर पाने के लिए अच्छे कर्म की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए जीवन में अच्छे कर्म करना चाहिए वे जैसा कर्म करेंगे। ठीक उसी प्रकार उन...
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