मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 27 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। भगवान ने कभी कहीं जात-पात की बात नहीं की है। वे तो भाव के भूखे हैं। प्रभु श्रीराम ने केवट, शबरी और निषाद को जो सौभाग्य प्रदान किया, वह यह साबित करने के लिए पर्याप्त है। श्रीरामचरितमानस में इसका उल्लेख है। ये बातें जिला स्कूल के प्रांगण में जारी नौ दिवसीय श्रीरामकथा के छठे दिन कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने कहीं। कथा वाचक ने कहा कि जितना हो सके जीवन को सरल और सहज बनाना चाहिए। सहजता ही ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सदा गलत प्रवृत्ति के लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। क्षण मात्र का कुसंग भी जीवन भर के तप को नष्ट कर देता है। कथा क्रम में भगवान के वन प्रदेश की मंगल यात्रा से जुड़े प्रसंगों पर कहा कि भगवान श्रीराम को अपने भरत से भी ज्यादा प्रेम करने व...
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