दरभंगा, जनवरी 16 -- दरभंगा। कला, साहित्य एवं संगीत हमारे जीवन को परिष्कृत करते हैं, जिनसे हमारा जीवन स्वस्थ, सुंदर और सार्थक बनता है। छन्दों के साथ प्रकृति का तादात्म्य संबंध है। संगीत की चेतना हमें प्रकृति से मिलती है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में आयोजित संगोष्ठी में ऋषिहुड विश्वविद्यालय, सोनीपत, हरियाण के मानव विकास केंद्र के निदेशक प्रो. सम्पदानंद मिश्र ने उक्त बातें कही। पारंपरिक संस्कृत छन्द और आधुनिक संगीत विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. मिश्र ने कहा कि एक छन्द में निबद्ध काव्य या गीत को अनेक तरह से पढ़ा या गाया जा सकता है। छन्द केवल काव्य या संगीत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारे हर सांस एवं पशु-पक्षियों के संचार सहित पूरी प्रकृति में विद्यमान है। आधुनिक फिल्मी गानों का संबंध ह...