दरभंगा, फरवरी 18 -- दरभंगा। मिर्जा गालिब का कलाम इंसान के जज्बात, उसकी खुशी-गम और दोस्ती को केंद्र में रखता है, जो सदाबहार है। आज के बदलते दौर, सामाजिक उथल-पुथल, अकेलेपन और दार्शनिक जिज्ञासाओं के बीच अपनी गहरी छाप छोड़ता है। लनामिवि के पूर्व रजिस्ट्रार एवं वर्तमान में सीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद ने लनामिवि के स्नातकोत्तर उर्दू विभाग में आयोजित सेमिनार में ये बातें कही। आधुनिक युग में कलामे गालिब की प्रासंगिकता विषयक राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य वक्ता प्रो. अहमद ने कहा कि गालिब के शेर केवल प्रेम या विरह नहीं, बल्कि जीवन के वास्तविक तर्कवाद और अस्तित्व संबंधी संघर्षों को दर्शाते हैं। गालिब के कलाम जीवन के संघर्षों को हताशा के बजाय चुनौती के रूप में बतलाता है, जो आज के समय में लोगों को प्रेरणा देता है। उन...
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