जे कृष्णमूर्ति, नवम्बर 18 -- जब मन ज्ञात से पूरी तरह मुक्त होता है, तभी आप स्पष्टता, सच्चाई और यथार्थ अनुभव के साथ पता लगा सकते हैं कि ईश्वर है अथवा नहीं है। मन मात्र यही कर सकता है कि इस बात की जांच करे कि स्वयं को ज्ञात से मुक्त करना संभव है अथवा नहीं। ज्ञात से मुक्त होना अतीत के सारे प्रभावों, परंपरा के सारे भार से मुक्त हो जाना है। मन अपने आप में ज्ञान की उपज है। जब यह उदित होता है, तब ज्ञात चेतन और अचेतन स्तर पर पूरी तरह समाप्त हो जाता है। जीवन का वास्तविक लक्ष्य क्या है? सबसे पहले तो यही कि आप इसका करते क्या हैं? जीवन का लक्ष्य वही है, जो आप इसे बनाएंगे। जैसे आप किसी दुखी मनुष्य के पास जाएंगे, तो वह कहेगा कि उसके लिए जीवन का लक्ष्य प्रसन्न होना है। जो मनुष्य भूखा जी रहा है, उसका लक्ष्य होगा कि पेट भरा होना चाहिए। अगर एक संन्यासी के ...
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