नई दिल्ली, जून 3 -- नई दिल्ली। छोटे कारोबारियों पर जीएसटी की वजह से नकदी प्रवाह का बोझ बढ़ रहा है। कारोबारियों को हर चालान पर जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, जबकि उनके क्लाइंट भुगतान में महीनों तक देरी करते हैं। यह बोझ उनकी कार्यशील पूंजी को खत्म कर रहा है। समस्या इतनी गंभीर है कि कभी-कभी उन्हें जरूरी कामकाज के लिए उधार लेने या बचत में से पैसे निकालने पड़ते हैं। नकदी प्रवाह संकट की वजह जीएसटी की संरचना है। यानी चालान जारी होते ही जीएसटी का भुगतान करना होता है, न कि जब पैसा वास्तव में आता है। नियमों के तहत, कंपनियों को चालान की तारीख या भुगतान की तारीख, जो भी पहले हो, पर कर का भुगतान करना चाहिए। लेकिन व्यवहार में, भुगतान आमतौर पर बिलिंग के 40 से 90 दिनों के बाद होते हैं। इस वजह से छोटी फर्मों को जेब से जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है। अभी क...
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