वाराणसी, जनवरी 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। लोग सोचते हैं ख्याल गाना सीख लिया तो ठुमरी भी गा लेंगे। आज-कल तो जिसे देखो वही ठुमरी गा रहा है। सच यह कि ठुमरी गाना इतना आसान भी नहीं है। ठुमरी वही गा सकता है जिसने प्रेम किया हो। प्रेम में जिसका दिल टूटा हो। यह कहना है पद्मश्री मालिनी अवस्थी का। बनारस लिट् फेस्ट के पहले दिन नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल के साथ संवाद सत्र में मालिनी अवस्थी ने कहा कि जब तक प्रेम और दिल टूटने के दर्द की अनुभूति नहीं होगी वह भाव ठुमरी गायन में उभर ही नहीं पाएगा। संवाद के दौरान उन्होंने भारतेंदु बाबू और मैना बाई से जुड़ा वाकया भी सुनाया। हुआ यह कि मैना बाई कथक पर भाव नृत्य कर रही थीं। महफिल में भारतेंदु बाबू भी थे। एक भाव में कुछ ऊंच-नीच हुई तो भारतेंदु बाबू ने टोक दिया। जवाब में मैना बाई ने क...