खगडि़या, नवम्बर 25 -- खगड़िया । एक प्रतिनिधि कुआं हमारे लिए एक धरोहर है। कुएं हमारी पुरानी विरासत और जल संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। सदियों से ये न केवल मानव निर्मित प्राकृतिक पेयजल का स्रोत रहे हैं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने और वर्षा जल संचयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। आज आधुनिकता की दौड़ में ये अनमोल धरोहरें विलुप्त होने के कगार पर हैं, जो या तो सूख गई हैं या कचरे से भर दी गई हैं या तो उपेक्षित पड़ी हैं। जिले के पसराहा पंचायत के सोंडीहा वार्ड 15 स्थित सार्वजनिक कुआं को लोगों द्वारा ईंट, पत्थर, कचरे से भर दिया गया है। बूढ़े बुजुर्ग बताते हैं कि यह कुआं सौ साल से भी पुराना है। इसका अस्तित्व मिटने के कगार पर है। गांव के बुजुर्ग पूर्व मुखिया कांग्रेस सिंह, शंकर साह, आनंदी सिंह, शिवनंदन गुप्ता, अनिरुद्ध सिंह, नाथो यादव, सकलदेव गु...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.