सहरसा, जून 12 -- सहरसा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के कई दवा दुकान धड़ल्ले से चल रहा है। ऐसे दवा दुकानदार खुद डाक्टर की पेशा भी निभाते हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के दवा दुकान पर न तो कोई बिल दिया जाता है और न ही दवा सही है या नहीं इसकी कोई गारंटी रहती है। खासकर ग्रामीण इलाकों में बिना रजिस्ट्रेशन की दवा दुकानों की भरमार है। अधिकांश लोग दवा की जानकारी प्राप्त कर इलाज करना शुरू कर देते हैं और फिर खुद ही दवा दुकान खोल कर दवा चलाते हैं। स्थानीय लोगों को इससे कोई मतलब नहीं रहता है कि दवा दुकान लाईसेंसी या दवा सही है या नहीं। वे रोग से राहत के लिए मजबूरी में दवा दुकान पहुंचकर इलाज करवा लेते और जो भी राशि मांगी जाती उन्हें देना पड़ता है। हालांकि औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा जबतब निरीक्षण और छापेमारी की जाती है। जानकारी अनुसार इस ब...
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