मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 14 -- मुजफ्फरपुर। शहर की गोला, सूतापट्टी, आमगोला, जवाहरलाल रोड, बाजार समिति सहित हर बड़ी मंडियों में ठेला चालकों व पलदारों के सहारे कारोबार चलता है। इनकी जिंदगी रोज कमाओ और खाओ के आधार पर चलती है। एक दिन काम नहीं मिले तो फाकाकशी पर आ जाना पड़ता है। शहर की मंडियों से करीब दो हजार ठेला चालक जुड़े हुए हैं। इन्हें अपने ग्राहकों को संतुष्ट रखने के लिए ठेला चलाने के साथ सामान लादने वाले पलदार का भी काम करना पड़ता है। गोला मंडी में दो सौ से तीन सौ हाथ रिक्शा-ठेला चालक हैं। कड़ी मेहनत के बाद भी ये दिनभर में दो से पांच सौ रुपये तक ही कमा पाते हैं। इन्हें न तो स्वास्थ्य सुविधा मिल पा रही है न ही पेंशन का लाभ। इनके लिए सामूहिक बीमा की भी कोई व्यवस्था नहीं है। भले ही इनके काम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती है, लेकिन पूरा बाजार इनके...