बिहारशरीफ, सितम्बर 12 -- जिउतिया : गांवों में कला का होता था प्रदर्शन, अब हो रही लुप्त नाटक के माध्यम से दी जाती थीं जानकारियां, लोगों में रहता था उत्साह आधुनिकता की दौड़ में खत्म होती जा रही पुरानी परंपरा फोटो जिउतिया : जिउतिया के दौरान कला का प्रदर्शन करते युवा। (फाइल फोटो) थरथरी, निज संवाददाता/रौशन कुमार। 20वीं शताब्दी में जिउतिया का प्रचलन खूब था। नौ दिनों तक गांव में खेल-तमाशा का दौर चलता था। लेकिन, 21वीं सदी में गांवों में जिउतिया का प्रचलन धीरे-धीरे समाप्त हो गया। आधुनिकता की दौर में पुरानी परंपरा लुप्त होती जा रही हैं। प्रखंड के मेहतरावां गांव निवासी 62 वर्षीय सुरेंद्र पाण्डेय, शम्भुकान्त शर्मा, रामबालक पासवान व अन्य बताते हैं कि पहले आश्विन मास शुरू होते ही जिउतिया में खेल-तमाशा करने को लेकर युवाओं में गजब का उत्साह रहता था। मेहत...
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