कौशाम्बी, नवम्बर 23 -- जिंदा होने का सुबूत देने में करीब आठ साल लग गए। तमाम कवायदों के बाद अधिकारियों ने किसी तरह जीवित माना तो सिर्फ 10 बिस्वा जमीन दिलाई। बाकी की ढाई बीघा भूमि अभी तक नहीं दिलाई जा सकी है। इसके लिए पीड़ित दर-दर की ठोकरें खा रहा है। कभी डीएम तो कभी कमिश्नर की चौखट पर दस्तक देता है। आश्वासन की घुट्टी सभी पिलाते हैं। इंसाफ दिलाने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। परेशान होकर पीड़ित ने अब राष्ट्रपति को पत्र भेजा है और इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है। हम बात कर रहे हैं सिराथू तहसील क्षेत्र के जवई पड़री गांव निवासी अशोक विश्वकर्मा की। करीब 60 वर्षीय अशोक ने बताया कि वह दो भाई थे। छोटे भाई संजय की मौत काफी पहले हो चुकी है। वर्ष 1991 में पिता सूरजबली की भी मृत्यु हो गई। फिर 1995 में प्रॉपर्टी उनके नाम दर्ज हो गई। आरोप है कि 2014 में ...