नई दिल्ली, नवम्बर 14 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महिला को जिंदा जलाने के मामले में उसके पति और बेटे की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। हालांकि अपील लंबित रहने के दौरान पति दीदार सिंह की मौत हो चुकी है, जबकि बेटा मान सिंह अब भी फरार है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा कि सबूतों की श्रृंखला और पीड़िता के मृत्युपूर्व बयान से साबित होता है कि यह हत्या थी, न कि आत्महत्या या हादसा। अदालत ने अपने फैसले की शुरुआत एक गीत की पंक्ति...'पूत कपूत सुने हैं पर न माता सुनी कुमात' का जिकर करते हुए कहा कि मां और बच्चे के संबंध में स्वार्थ की कोई गुंजाइश नहीं है। मामला अप्रैल 2000 का है, जब पीड़िता ज्ञान कौर अपने घर की छत पर सो रही थी। तड़के उसकी बेटी और पड़ोसियों ने उसे आग की लप...