लखनऊ, फरवरी 4 -- हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजनीतिक दलों की ओर से जातीय रैली के विरुद्ध दाखिल एक जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान कानून के तहत किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को केवल इस आधार पर चुनाव लड़ने से पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता कि वह जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह विषय विधायिका का है। वह इस संबंध में कानून बनाए। चुनाव आयोग भी किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकरण इस आधार पर समाप्त नहीं कर सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। न्यायालय ने याचिका पर विस्तृत निर्णय पारित करते हुए कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8-ए ही एकमात्र प्रावध...