वाराणसी, नवम्बर 28 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। श्रीसंकटमोचन मंदिर में श्रीराम विवाह पंचमी महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को कथा श्रवण कराते हुए प्रख्यात मानस मर्मज्ञ डॉ. भारत भूषण पांडेय ने कहा कि जहां विप्र नहीं होंगे वहां देवत्व भी नही होगा। ऐसे स्थानों पर आसुरी प्रवृत्ति होगी और चहुओर भय का वातावरण होगा। उन्होंने कहा कि जहां भय हो वहां आसुरी शक्ति वास होगा। जहां अभय हो वह दैवीय शक्ति का प्रमाण है। जब चातुर्दिक भय का वातावरण बना तभी श्रीराम और परशुराम का मिलन हुआ। आचार्य परमेश्वर दत्त शुक्ल ने कहा कि संसार रूपी भवसागर से पार होना है तो भगवान रूपी भुजाओं का सहारा लेना होगा। पं. नंदलाल उपाध्याय ने प्रभु के अनुपम सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ज्ञान और मां जानकी भक्ति की सागर है। इनका विवाह ज्ञान और भक्ति का मिलन है। पं. श्य...